Shighrapatan Treatment Yoga- शीघ्रपतन योग के द्वारा पूरी तरह से दूर करे
इन सभी समस्याओं का एक आसान सा समाधान है जिसमे किसी प्रकार की कोई दावा या
दुआ की आवश्कता नहीं होती और वो सरल उपाय है हमारे भारत की प्राचीन विधा
जिसे हम योगा के नाम से जानते हैं| रोजाना आप एक घंटा योगा का अभ्यास करके
अपने मस्तिक और शरीर के लग भग सभी functions सही कर सकते हैं| योगा आपके
शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार करती है जिसे की आपके शरीर में
स्वास्थ्य और नव उर्जा का संचार होता है| यहाँ कुछ जरुरी योगा आसन बताये
जायेंगे जो की आपकी शिघ्रपतन और मर्दाना कमजोरी की समस्या को जड़ से दूर कर
देंगे| इनका रोजाना आपको कुछ देर अभ्यास करना होगा
स्वप्नदोष,शीघ्रपतन,नपुंसकता की समस्या योग
Sarvanga Asana
sarvanga संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर
बना है जिसका अर्थ है सभी अंग यानि ये आसन आपके अभी अंगो की सेहत सुधारता
है और शरीर के अभी अंगो को फिर से स्वस्थ बनाने में मदद करता है| इस आसन का
अभ्यास आपकी यौन शक्ति को सुधारता है साथ ही जन्न तंत्र की सेहत भी बेहतर
करता है| इसे करने के लिए
- आप आराम से जमीन पर लेट जाइये|
- सांस अन्दर लेते हुए अपनी टांगों को ऊपर उठाइए |
- आपने हाथों से अपनी कमर को सहारा देते हुए अपनी बॉडी को जितना हो सके ऊपर उठाइए|
- अब कुछ सेकंड्स इसी पोजीशन में रहने के बाद अपने शरीर को धीरे धीरे नीचे लाइए|
Kandasana
Kandasana को सभी प्रकार के यौन रोग दूर
करने के लिए अबसे असरदार आसन माना जाता है| ये मर्दाना कमजोरी, स्तम्भन
दोष, शीघ्रपतन की समस्या तो दूर करता ही है साथ ही इसका नियमित अभ्यास आपके
शरीर की लचक बढाता है और जोड़ों के दर्द को दूर करता है|
- आप नीचे बैठ जाइये |
- अपनी टांगों को मोड़ते हुए अपने पैरों को सीने की और लाइए |
- पैरों का आधार सीने की और रखिये|
- कुछ सेकंड्स इसी स्तिथि में रहने के बार relax कीजिये|
हलासन (Plow Pose)
गुप्त रोग ठीक करने में लाभदायक हलासन
आपके पाचन तंत्र, दिमाग,, और शरीर के दुसरे कई कष्ट दूर करता है| ये पाचन
मजबूत करता है और महिलाओं में रजोनिवृत्ति के लक्षणों से निपटने में मदद
करता है|
- सीधे लेट जाइये
- अपनी टांगों को जोड़कर उठाइए और अपने शरीर के साथ 90 डिग्री का कोण बनाइये|
- अपनी कमर को मोड़ते हुए अपनी टांगों को अपने सर के ऊपर जमीन पर टिका लीजिये |
- इस स्तिथि में कुछ देर रहने के बाद relax कीजिये|
गोमुखासन
इस आसन का नियमित अभ्यास यौन और गुप्त
रोगों को तो दूर करता ही है साथ ही ये आपको सेहतमंद शरीर और तेज दिमाग पाने
में भी काफी सहायक होता है|
- जमीन पर सीधे बैठ जाइये और सांस अन्दर लेते हुए अपनी दाहिनी टांग को बाई के ऊपर रखिये|
- अब अपने बाएँ हाथ से अपने दाहिने हाथ की अँगुलियों को छूने की कोशिश करें|
- आपको कुछ देर इसी स्तिथि में रहना है|
- अब इसी आसन को शरीर के दुसरे भाग के लिए करना है मतलब अब आपको बायीं टांग को दाहिनी के ऊपर रखना होगा और दाहिने हाथ से बाएँ हाथ की अँगुलियों को छूना होगा|
वज्रासन
योगा गुरुओं के अनुसार वज्रासन भी मर्दाना
कमजोरी, शीघ्रपतन और दुसरे शारीरिक रोग जड़ से मिटने में काफी उपयोगी माना
जाता है| ये कब्ज रहने की समस्या ख़तम करता है, जन्न अंगों में खून का बहाव
बेहतर करता है|
- आप अपनी टांगों पर सीधे बैठ जाइये
- अपने हाथों को सीधे अपने घुटनों पर रखिये
- अब पेट अन्दर खींचते हुए सीने की बहार की और निकालिए|
मंडूकासन (Mandukasana)
इसे अंग्रेजी में frog pose कहते हैं| ये
आसन भी कई प्रकार के गुप्त रोगों को ठीक करने में असरदार माना जाता है| ये
पेट के सभी अंगों की सेहत सुधारता है, मानसिक चिंता और तनाव कम करता है,
पेट में गैस रहने को दूर करता है|इसमें वज्रासन की स्तिथि में बैठकर अपने दोनों हाथों को फोल्ड करके अपने शरीर को अपनी thighs पर टिकाना होता है|हमें पता है की इनमें से कुछ आसन थोड़े
मुश्किल हैं लेकिन इनके निरंतर अभ्यास से आप जल्द ही इन्हें सही ढंग से कर
पाएंगे | आप किसी अनुभवी योगा एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते है| किसी के देख
रेख में ये आसन किये जायें तो ही अच्छा होगा|तो दोस्तों ये कुछ योगा आसन थे जिन्हें
करके आप शीघ्रपतन और मर्दाना कमजोरी को दूर कर सकते हो| हम फिर कहेंगे की
सही खान पान, सही जीवनशैली और नियमित योगा से आप बिना दवा, मंत्र या टोटके
से अपने शरीर के सभी रोग दूर कर सकते हो| यदि ऊपर दिए गाये योगा से भी कुछ
दिनों तक फर्क न पड़े तो अपने डॉक्टर की सलाह लीजिये|
इसके अलावा बुरी आदतों जैसे नशा करना और मानसिक तनाव से दूर रहिये ताकि आपके शरीर के सभी कार्य सुचारू रूप से चलते रहे|इसके अलावा मर्दाना कमजोरी और स्तम्भन दोष में अश्विनी मुद्रा विशेष रूप से उपयोगी मणि जाती है|
1. वज्रोली क्रिया :
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जब भी मूत्र त्याग करे तब एकदम से मूत्र को रोक ले .कुछ सेकेण्ड रोकें ..फिर नाड़ियों को ढीला छोड़ें और मूत्र निकलने दे ..पुनः रोके इस तरह मूत्र त्याग के दौरान कई बार इस क्रिया को करें | इस क्रिया के द्वारा नाड़ियों में शक्ति आएगी .फिर वीर्य के स्खलन को भी आप कंट्रोल कर सकेंगे | हमारा मस्तिष्क मूत्र त्याग व वीर्य स्खलन में भेद नही कर सकता ….यही कारण है कि इस क्रिया द्वारा स्खलन के समय में उसी अनुपात में बढ़ोत्तरी होती है जिस अनुपात में आप मूत्र त्याग के समय कंट्रोल कर लेते है |
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जब भी मूत्र त्याग करे तब एकदम से मूत्र को रोक ले .कुछ सेकेण्ड रोकें ..फिर नाड़ियों को ढीला छोड़ें और मूत्र निकलने दे ..पुनः रोके इस तरह मूत्र त्याग के दौरान कई बार इस क्रिया को करें | इस क्रिया के द्वारा नाड़ियों में शक्ति आएगी .फिर वीर्य के स्खलन को भी आप कंट्रोल कर सकेंगे | हमारा मस्तिष्क मूत्र त्याग व वीर्य स्खलन में भेद नही कर सकता ….यही कारण है कि इस क्रिया द्वारा स्खलन के समय में उसी अनुपात में बढ़ोत्तरी होती है जिस अनुपात में आप मूत्र त्याग के समय कंट्रोल कर लेते है |
2. बाह्य कुम्भक :
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लाभ :
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1- इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होकर वृत्ति निरोध होता है |
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1- इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होकर वृत्ति निरोध होता है |
2- इससे बुद्धि सूक्ष्म एवं तीव्र होता है |
3- वीर्य स्थिर होकर स्वप्नदोष और शीघ्रपतन छुटकारा मिलता है |
विधि :
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किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर पूरी शक्ति से श्वास को एक बार में ही
बाहर निकल दें |
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किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर पूरी शक्ति से श्वास को एक बार में ही
बाहर निकल दें |
श्वास को बाहर निकालकर मूलबंध (गुदा द्वार को संकुचित करें) और उड्डीयान
बंध (पेट को यथाशक्ति अंदर सिकोड़ें) लगाकर आराम से जितनी देर रोक
सकें,श्वास को बाहर ही रोककर रखें |
बंध (पेट को यथाशक्ति अंदर सिकोड़ें) लगाकर आराम से जितनी देर रोक
सकें,श्वास को बाहर ही रोककर रखें |
जब श्वास अधिक समय तक बाहर न रुक सके तब बंधों को खोलकर धीरे-धीरे श्वास
को अंदर भरें | यह एक चक्र पूरा हुआ |
को अंदर भरें | यह एक चक्र पूरा हुआ |
श्वास भीतर लेने के बाद बिना रोके पुनः बाहर निकालकर पहले की तरह बाहर ही
रोककर रखें | इस प्रकार 3 से २१ चक्र किये जा सकते हैं |
रोककर रखें | इस प्रकार 3 से २१ चक्र किये जा सकते हैं |
सावधानी :
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यह प्राणायाम प्रातः खाली पेट करें |
श्वास बाहर इतना नही रोकना चाहिए कि लेते समय झटके से श्वास अंदर जाए और
उखड़े हुए श्वास को 5-6 सामान्य श्वास लेकर ठीक करना पड़े |
प्राणायाम के 30 मिनट बाद ही कुछ खाएं – पियें |
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यह प्राणायाम प्रातः खाली पेट करें |
श्वास बाहर इतना नही रोकना चाहिए कि लेते समय झटके से श्वास अंदर जाए और
उखड़े हुए श्वास को 5-6 सामान्य श्वास लेकर ठीक करना पड़े |
प्राणायाम के 30 मिनट बाद ही कुछ खाएं – पियें |
3. अश्विनी मुद्रा :
लाभ :
1- इस मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
2- शरीर में ताकत बढ़ती है तथा इस मुद्रा को करने से उम्र लंबी होती है।
3- माना जाता है कि इस मुद्रा से कुण्डलिनी का जागरण भी होता है।
4- यह मुद्रा शीघ्रपतन रोकने का अचूक इलाज है |
5- अश्वनी मुद्रा से नपुंसकता दूर होती है |
1- इस मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
2- शरीर में ताकत बढ़ती है तथा इस मुद्रा को करने से उम्र लंबी होती है।
3- माना जाता है कि इस मुद्रा से कुण्डलिनी का जागरण भी होता है।
4- यह मुद्रा शीघ्रपतन रोकने का अचूक इलाज है |
5- अश्वनी मुद्रा से नपुंसकता दूर होती है |
विधि :
कगासन में बैठकर (टॉयलैट में बैठने जैसी अवस्था) गुदाद्वार को अंदर
खिंचकर मूलबंध की स्थिति में कुछ देर तक रहें और फिर ढीला कर दें। पुन:
अंदर खिंचकर पुन: छोड़ दें। यह प्रक्रिया यथा संभव अनुसार करते रहें और
फिर कुछ देर आरामपूर्वक बैठ जाएं।
कगासन में बैठकर (टॉयलैट में बैठने जैसी अवस्था) गुदाद्वार को अंदर
खिंचकर मूलबंध की स्थिति में कुछ देर तक रहें और फिर ढीला कर दें। पुन:
अंदर खिंचकर पुन: छोड़ दें। यह प्रक्रिया यथा संभव अनुसार करते रहें और
फिर कुछ देर आरामपूर्वक बैठ जाएं।
विशेष
यह क्रिया दिन में कई बार करें, एक बार में कम-से-कम 50 बार अश्वनी मुद्रा करें |
Thank for sharing very useful post. very informative post. Hashmi mughal-e-azam plus capsule is also very effective for premature ejaculation.
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